Thursday, February 26, 2015

लेट देयर बी नो वार !


डब्ल्यू. डब्ल्यू. गिब्सन (1878-1962): अंग्रेज जार्जियन कवि। हेक्सम, नार्थम्बरलैंड में जन्म। केवल स्कूली शिक्षा। 11 वर्ष की उम्र से लगातार काव्य लेखन। रूपर्ट ब्रुक के गहरे दोस्त। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान लिखी कविताओं में सामान्य सैनिकों की पीड़ा, फ्रंटलाइन योद्धाओं के यथार्थ और खाइयों के अनुभव की अभिव्यक्ति। काव्य संग्रह हैं: 'बैटल', 'फ्रेंड्स', 'लाइवलीहुड', 'नेबर्स' और 'कलेक्टेड पोयम्स'




लौटने पर

  • डब्ल्यू. डब्ल्यू. गिब्सन (1915)  


वे पूछते हैं मुझसे कि मैं कहाँ गया था,
क्या किया और क्या देखा मैंने।
किंतु मैं क्या उत्तर दूँ
कोई नहीं जानता कि वह मैं नहीं था,
वह था ठीक मेरे जैसा ही,
जो गया था समुद्र पार
और जिसने मेरी बुद्धि और कौशल से
विदेशी जमीन पर मार गिराए सैनिक...
अब दोषारोपण मुझे ही करना होगा बर्दाश्त
कि उसने बदल कर रख लिया था मेरा नाम।



पहल 98 से साभार 
हिन्दी अनुवाद : बालकृष्ण काबरा 'एतेश'

1 comment:

  1. एक सैनिक का जीवन यही है

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