Monday, September 28, 2009

कुल्लू का दशहरा

नवरात्र खत्म, आज विजय दशमी है. यानि कि रावण का पुतला जलाने का दिन. हिन्दुस्तानियों का खुश होने का तरीक़ा . दुनिया भर की तमाम कौमें खुश होने के ऐसे ही तरीक़े ईजाद करतीं रहती हैं।



मैं कुल्लू मे हूं . पिता के पास. यहां का दशहरा कुछ अलग ही है. चूंकि लाहुल के किसान आलू और मटर बेच चुके हैं. कुल्लू का सेब बिक चुका है, ज़ाहिर है यहां भारी मेला लगने वाला है. हिमाचल् टूरिज़म ने इस मेले को हमेशा के लिए अंतर्राष्ट्रीय लोक नृत्य उत्सव घोषित कर रखा है।



ऐसे सैंकड़ों देवता दूर दूर से यहां आते हैं, रघुनाथ जी को सलाम ठोक कर चले जाते हैं.





उनके साथ अनेक बजंत्री चलते हैं - ढोल नगाड़े, , करनाले, रणसिंगे और शहनाई बजाते हुए . इन देवताओ को प्रशासन बतौर नज़राना कुछ धन देती है.

रघुनाथ यहां के सामंत महेश्वर जी के कुल देवता हैं. आज रघुनाथ जी का रथ खींचा जा रहा है।





महेश्वर जी की जलेब देखने के लिए ढालपुर मैदान में बड़ी भीड़ उमड़्ती है. वे बी जे पी से चुनाब भी लड़ा करते हैं. रघुनाथ का रथ और राजा जी की पारम्परिक जलेब के इलावा पता नही कब से यहां आर एस एस का परेड शो भी होने लगा है।



हिमाचल की सांस्कृतिक राजधानी मंडी के एक क़ामरेड लवण ठाकुर को लोक तंत्र के इस युग मे इन सामंती चोंचलों से खासी नफरत है. बजंत्रियो और अन्य देव कारकूनों के पक्ष वे अपनी गिरफ्तारी भी दे चुके है. उन की मांग है कि
या तो नज़राने मे दलित कारिन्दों का हिस्सा बढ़ाया जाए. या जलेब की परम्परा खत्म हो. (या फिर पालकी में डी सी साब बैठें. ) 'सूचना का अधिकार अधिनियम ' के तहत लवण ठाकुर ने इस महामेले की आय व्यय का हिसाब भी मांग रखा है.

जनता मस्त है. आखिर महनत कश साल मे एकाध बार मस्त होना भी तो चाहता है.

10 comments:

  1. अजेय जी ये बहुत मुश्किल मामला है.भारत में बड़ी, 'महान' परम्पराएं तत्वतः सामंती मूल्यों का ही पोषण करती है और इनसे सामंती प्रभाव हटाना कुछ असंभव सा है.हम लोग वैसे भी अतीत की भारी गठरी हर वक़्त लादे रहते हैं. यहाँ लोकतंत्र भी बिना लफडे के स्मूदली आ गया, इसलिए हम सब कुछ साथ लिए चल रहें हैं.

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  2. कुल्लू के दशहरा के बारे मैं बहुत सुना था....आज पोस्ट और चित्र के माध्यम से आपने दिखा भी दिया...बहुत ही अद्भुत लगा पढ के...

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  3. सर ए जलेब क्‍या होता है. ए खाने की चीज है या देखने की. आप क्‍या कहना चाहते हैं समझ नहीं पा रहे.

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  4. राजा जी की झांकी होती है सर जी. आठ दिन तक मेला चलता है. आठों दिन राजा की पालकी अपने कन्धों पे उठाए ग्रामीण लोग मेले में घूमते हैं. जलेब की फोटू आठ्वें दिन लगाऊंगा.देख लेना . खाना चाहो तो खा लेना ई की मात्रा लगा कर.
    संजय व्यास जी, आप ने सही कहा. लेकिन प्रगति वादी विचार धारा क्या इतनी कमज़ोर है कि इन मामूली संस्कारों से हमे मुक्त नही कर पाई.हम पढ़े लिखों को भी....

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  5. अजेय जी फ्रांस की क्रान्ति जैसे विषय को जब थोडा विस्तार से पढना पड़ा, जो काफी बोरियत भरा रहा मेरे लिए, तो उसमे एक बात समझ आई कि वो लगभग हर माने में क्रान्ति थी,उसमे सबसे ज़रूरी तत्त्व था 'sharp break from the past'.
    शायद इसीलिए प्रगतिशील विचारधारा ऐसा नहीं कर पाई.एक बड़े आयोजन से वंचित रहने के कारण.

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  6. अजेय भाई एक अच्छी पोस्ट है यह। यदि जलेब पर विस्तार से कुछ लिखो तो पढना चाहूंगा। अच्छा लग रहा है कि ब्लाग के कारण ही सही, आप उन विषयों पर लिखने को अग्रसर हो रहे हैं जिनके बाबत मैं चाहता रहा कि आप लिखें।

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  7. kay baat hai Kulu Deshera ki yaad karo woh din / rateine jab athak gooma karte they poore mele me.par ek baat hai hamesha katash teek nahi, kabhi prashansha bhi kiya karo,koyon ki yeh sahbhi ko aachi lagti hai.

    thanx 4 d post.
    roshan

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  8. राशन भाई शुक्रिया, कि आप को कुल्लू दशहरा की रातें याद हैं. ( और दिन भी) लेकिन इन नोट्स मे कटाक्ष कहां है ? मेरे पास जो सूचनाएं थीं, यहां रख दी हैं. न प्रशंसा की है न ही निन्दा. पाठक स्वयम परखे चीज़ों को.
    आप विचलित होते हों तो आप की समस्या है. (मेरी उपलब्धी )
    आप तृप्त होते हों तो आप की खुश्किस्मती है. ( मेरी उपलब्धी)

    अल्बत्ता कुछ चीज़ें छूट गई हों तो बताएं, इस मे जोड़ देते हैं.

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  9. अजेय भाई कुल्लू दशहरा हिमाचली होने के नाते मेरे लिए तो नय नहीं लेकिन आप का ब्लॉगिंग में उतर आना बहुत ही सुकून पहुँचाता है। कुल्लू दशहरे को आपने बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत किया है।

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  10. लाहुल के एकमात्र इतिहासकार तोब्दन जी की यह टिप्पणी ई- मेल पर मिली.
    priya ajeya

    julye

    aap kullu ke dussehra ka varnan pdhah. sunder hai. chitra bhi hain. dhanyabad.


    tobdan


    पॉप अप विंडो एक्टिवेट न होने के क़ारण् बहुत से मित्र कमेंट नही कर पाए. असुविधा के लिए खेद है. आज विजय गौड़ से पूछ कर इसे दुरुस्त कर दिया है . समय की कमी के चलते सबों के ई-मेल यहां नही दे सकूंगा. इधर नया हूं, क्षमा करेंगे.

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